Saturday, January 7, 2023

मुरझाया सा क्यूँ

गुंचे सारे आज थोड़ा मुरझाया सा क्यूँ। 

कम्बख्त दिल आज थोड़ा घबराया सा क्यूँ।


वह मेरी ज़िन्दगी से बेखबर हो गयी है -तो 

मुझको लग रहा है थोड़ा आज़माया सा क्यूँ।


फिलहाल में उसको भूल चुका हूँ पूरा - पर 

एक तस्वीर से थोड़ा दिल धड़काया सा क्यूँ।


आजकल ज़िन्दगी को मुस्कुराते जी लेता हूँ -पर 

उस मुस्कराहट में ग़म थोड़ा छुपाया सा क्यूँ।  

  


 

 




समझा 


उलझा जाता है। 

सुलझा जाता है। 

इंसान  हो या फिर गुल, टूटने के बाद मुरझा जाता है। 

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