एक मन था मेरे पास, वो खोने लगा है,
दिल को तेरी यादों का रोग लगने लगा है।
मेरा हर रास्ता तेरी तरफ मुड़ने लगा है।
इश्क़ का ये रंग मुझपे चढ़ने लगा है।
सजदा अब बस तेरी चौखट पे होने लगा है।
Musings of a man who is constantly trying to give new perspectives to things we all seemingly know already.
एक मन था मेरे पास, वो खोने लगा है,
कहने की नही बात मगर कहना है,
रुप क्यूँ है दमका, रंग क्यूँ है चमका, साँस तेरी महकी है क्यूँ?
सफ़र में कोई भी हमसफ़र इकरार न हुआ,
हम चलते ही रहे पर दिल को करार न हुआ। ।
रास्तों ने हमें आज़माया जाने कितनी दफ़ा,
मगर कहीं भी उम्मीद का कोई दीदार न हुआ। ।
हवा तो थी मगर उड़ानों का ज़रा भी वक़़्त न था,
परों में जोश था लेकिन कोई पैग़ाम न हुआ। ।
हमने उम्रभर चराग़ों की तरह जलना तो सीखा,
पर रोशनियों को हमारी कोई स्वीकार न हुआ। ।
‘मनन’ ने दिल की हर धड़कन में तेरी याद बचाई,
क्या-क्या किया मगर तुझसे कभी इज़हार न हुआ। ।
==============
On this journey, not even a momentary companion ever came my way;
I kept walking endlessly, yet my heart never found a moment of peace. ।
The roads tested me again and again, in countless ways;
But nowhere did I ever witness even a glimpse of true hope. ।
There was wind, yes—but never the right moment for flight;
My wings had passion, yet no message of destiny arrived. ।
All my life I learned how to burn like a lamp in the dark;
But my light was never welcomed or embraced by anyone. ।
Manan kept your memory alive in every heartbeat;
I did so much—but never found the courage to confess to you. ।
वो बचपना, वो हवाओं में बिखरी महकती-सी रुत-ए-बहार की याद,
हर दिल को रोककर छू ले, वही मासूम-सी बुझती–बुझती पुकार की याद ||
वो दिन कि धूप भी हम पर लोरी-सी गिरती थी सकूँ भर-भर,
हर मोड़ पे मिलती थी ख़्वाबों की वो मासूम सी मुस्कान की याद ||
काग़ज़ के बस्तों में महफ़ूज़ रखा अपना छोटा-सा जहाँ,
हर पन्ने पर खिलता था आने वाले कल का कोई उद्गार की याद ||
साइकिल की साँसों में उड़ता था बचपन का सारा समंदर,
हर मोड़ पे रुककर हमको बुलाती थी वो शहर-ए-गुज़ार की याद ||
मनन कहता है—अब भी रूह में झिलमिल करती है रातों में,
आईनों में चेहरा अपना देख जगाती है कोई नन्हा-सा निखार की याद ||
मुझे नींद ना आये पिया बिन देखे, अब किसे मिले चैन नैन।
हर घड़ी, हर पल, तेरा रूप बस जाए, जग में बस तेरे नैन।
तेरे आने की आहट पे काँप उठे ये दिल का हर दामन,
कहाँ छुपा रखे हैं तूने वो जादू, जो बसते हैं तेरे नैन।
चाँदनी भी शरमा जाए तेरे गालों की लाली के आगे,
सितारे भी झुक-झुक पूछें, किसके हैं ये मदमस्त नैन।
हवा में तेरी ख़ुशबू का पैघम लहराता है हर मौसम में,
मेरी रूह भी तेरी साँसों से बंधी है, तेरे ही तो हैं ये नैन।
"मनन" कहे, तेरे बिना ये ज़िन्दगी जैसे अधूरी कहानी,
हर जन्म में तुझे ही माँगे, तेरे प्यार भरे वो नैन।
चाँदनी रात में आँसू बहते हुए,
सजनी तेरा नाम लब पे कहते हुए।
साँस रुक-रुक के पुकारे तुझको,
दिल धड़कता रहा, जाँ से रहते हुए।
फूल सूखे हैं मुरझाए बाग़ों में,
तेरे क़दमों की आहट सहते हुए।
तेरे जाने से सन्नाटा बोल उठा,
सुरमई शाम ढली थी ढलते हुए।
"मनन" खो गया है तुझमें ही बेख़ुद,
ज़िन्दगी कट रही है भटकते हुए।
हर प्यार की फ़ितरत में बेवफ़ाई हो जाती है।
कुछ दिन रहते हैं, फिर तन्हाई हो जाती है।
जैसे जैसे वक़्त गुज़रता है शाइराना अंदाज़ में,
चुनौती-ए-वफ़ाई की शनासाई हो जाती है।
लम्हों की महफ़िल में यादों की परछाई हो जाती है,
ख़ुशियों के दरमियाँ भी रुसवाई हो जाती है।
सफ़र-ए-इश्क़ में जो भी चलता है बेख़ौफ़,
उसे हर मोड़ पे इक आज़माई हो जाती है।
दिल की खामोशी भी अक्सर चीख़ सी लगती है,
नज़र से नज़र मिले तो सफ़ाई हो जाती है।
ग़म की किताब में लिखे हैं हज़ारों अफ़साने,
मगर हक़ीक़त में बस सच्चाई हो जाती है।
मनन ये दुनिया यूँ ही धोखा नहीं देती,
हर नक़ाब के पीछे रुसवाई हो जाती है।
ज़िन्दगी मुश्किलों का भण्डार है यह विश्वास नहीं होता
वर न मरने के बाद जलने तक का एहसास नहीं होता।
ग़म के पत्थर गिरे तो भी हँसने का इक आभास नहीं होता
दिल के ज़ख़्मों के पीछे ही हरदम तो निराश नहीं होता।
राह काँटों से भरी है मगर फूल भी खिलते जाते हैं
हर सफ़र में अंधेरे हों तब भी वो बेख़ास नहीं होता।
हँस के जीना ही असल में जीवन का परिहास है प्यारे
सिर्फ़ रो लेने से कोई दिल का विकास नहीं होता।
आसमाँ भी कभी ग़म बरसाए तो धूप भी फैलाती है
हर घड़ी रात उतरे तो उसका सन्यास नहीं होता।
"मनन" कहता है मुस्कुराओ, ग़म को भी साथ लेकर चलना
क्योंकि दुनिया में दुख के सिवा ही तो उपहास नहीं होता।
வாழ்க்கை சொல்லும் கதையெல்லாம் நாளை மறந்திடுமே, வாழ்ந்த தடங்கள் நாமில்லாமல் மண்ணில் மறைந்திடுமே! கல்லாய் கால்கள் கனத்தாலும் நின்று விடாதே, ...