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Wednesday, October 8, 2025

नैन

 मुझे नींद ना आये पिया बिन देखे, अब किसे मिले चैन नैन।

हर घड़ी, हर पल, तेरा रूप बस जाए, जग में बस तेरे नैन।


तेरे आने की आहट पे काँप उठे ये दिल का हर दामन,

कहाँ छुपा रखे हैं तूने वो जादू, जो बसते हैं तेरे नैन।


चाँदनी भी शरमा जाए तेरे गालों की लाली के आगे,

सितारे भी झुक-झुक पूछें, किसके हैं ये मदमस्त नैन।


हवा में तेरी ख़ुशबू का पैघम लहराता है हर मौसम में,

मेरी रूह भी तेरी साँसों से बंधी है, तेरे ही तो हैं ये नैन।


"मनन" कहे, तेरे बिना ये ज़िन्दगी जैसे अधूरी कहानी,

हर जन्म में तुझे ही माँगे, तेरे प्यार भरे वो नैन।

Thursday, September 25, 2025

तेरा नाम लब पे कहते हुए

 चाँदनी रात में आँसू बहते हुए,

सजनी तेरा नाम लब पे कहते हुए।


साँस रुक-रुक के पुकारे तुझको,

दिल धड़कता रहा, जाँ से रहते हुए।


फूल सूखे हैं मुरझाए बाग़ों में,

तेरे क़दमों की आहट सहते हुए।


तेरे जाने से सन्नाटा बोल उठा,

सुरमई शाम ढली थी ढलते हुए।


"मनन" खो गया है तुझमें ही बेख़ुद,

ज़िन्दगी कट रही है भटकते हुए।

Wednesday, September 17, 2025

हो जाती है

हर प्यार की फ़ितरत में बेवफ़ाई हो जाती है।

कुछ दिन रहते हैं, फिर तन्हाई हो जाती है।


जैसे जैसे वक़्त गुज़रता है शाइराना अंदाज़ में,

चुनौती-ए-वफ़ाई की शनासाई हो जाती है।


लम्हों की महफ़िल में यादों की परछाई हो जाती है,

ख़ुशियों के दरमियाँ भी रुसवाई हो जाती है।


सफ़र-ए-इश्क़ में जो भी चलता है बेख़ौफ़,

उसे हर मोड़ पे इक आज़माई हो जाती है।


दिल की खामोशी भी अक्सर चीख़ सी लगती है,

नज़र से नज़र मिले तो सफ़ाई हो जाती है।


ग़म की किताब में लिखे हैं हज़ारों अफ़साने,

मगर हक़ीक़त में बस सच्चाई हो जाती है।


मनन ये दुनिया यूँ ही धोखा नहीं देती,

हर नक़ाब के पीछे रुसवाई हो जाती है।


Friday, September 5, 2025

अन्दाज़ है सब

 

ज़िंदगी के यह भागदौड़ में आग़ाज़ है सब 
गुस्ताकियाँ फैले हैं, पर हमराज़ हैं सब ।।

इनको रोकने की कोशिश कभी न करो
आख़िर तक़दीर-ए-ख़ुद के सर्ताज़ हैं सब ।।

दाश्त-ए-तनहायी में गुल्फ़ाम की तलाश की
गुलाब-ए-उल्फ़त मुर्झा गये, नाराज़ है सब ।।

यहाँ तो पल-ए-सन्नाटा नामुमकिन है 
सबर कर लेना, ख़ुदा की आवाज़ है सब ।।

यह मत सोचो की सब कुछ टिकाऊ हैं
जब तक जान है महसूस करो, अन्दाज़ है सब ।।


காற்றுக்கென்ன பெயர்

 — தமிழுக்கும், அந்தத் தமிழை என் அய்யா கற்றுக்கொடுத்த நினைவுக்கும் ஒரு சிறு அஞ்சலி. இன்று காலை சிலப்பதிகாரம் மதுரைக் காண்டம் புரட்டிக் கொண்ட...