Friday, September 5, 2025

अन्दाज़ है सब

 

ज़िंदगी के यह भागदौड़ में आग़ाज़ है सब 
गुस्ताकियाँ फैले हैं, पर हमराज़ हैं सब ।।

इनको रोकने की कोशिश कभी न करो
आख़िर तक़दीर-ए-ख़ुद के सर्ताज़ हैं सब ।।

दाश्त-ए-तनहायी में गुल्फ़ाम की तलाश की
गुलाब-ए-उल्फ़त मुर्झा गये, नाराज़ है सब ।।

यहाँ तो पल-ए-सन्नाटा नामुमकिन है 
सबर कर लेना, ख़ुदा की आवाज़ है सब ।।

यह मत सोचो की सब कुछ टिकाऊ हैं
जब तक जान है महसूस करो, अन्दाज़ है सब ।।


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