Thursday, January 9, 2020

अंदाज़ न बदला

अलफ़ाज़
आवाज़
लिफ़ाज़ - respect
अंदाज़ न बदला
रियाज़
आग़ाज़ - beginning
फ़राज़ - height
परवाज़ - rising
नाराज़
नमाज़
शाबाज़ - handsome
नवाज़ - cherishing



Wednesday, January 8, 2020

ललित राग

तुम जुदा  हो, पर तेरी यादों को मिटाना नहीं है
जल्दी लौटो, मेरी ज़िन्दगी का कुछ टिकाना नहीं है।

अरमानों के दिये मेरे आँगन में जल रहे हैं
अब ख़ामोखा हवाओं को बुलाना नहीं है।

मेरी मुहब्बत की गहराई का महसूस है तुम्हें
मजनू बनके मुझे ज़माने को दिखाना नहीं है।

यह छुपा-छुपी ख़ेल कुछ ज़्यादा ही हो गया है
खुद को किसी और के आँचल में छुपाना नहीं है।

जल्दी बाहों में आ जाओ, ललित राग बज चुका है
सजाया हुआ सेज में मुझे तन्हाई को बिठाना नहीं है।

 
ललित राग - A late night Raga that is usually sung well past midnight

नहीं समझता हूँ

हलके से बोलके देखो - इशारों को नहीं समझता हूँ
इश्क़ को बताकर देखो - नज़ारों को नहीं समझता हूँ। 

ज़िन्दगी के तूफानों से सख़्त तना हुआ हूँ, यारों  
आँधियों को आज़माकर देखो - बहारों को नहीं समझता हूँ।

वक़्त ज़वाल का है, और धुंदला रास्ता दिखता नहीं  
बत्ती की सख़-ज़रुरत है - सितारों को नहीं समझता हूँ।

महफ़िल में भी मुझ जैसा कोई नहीं मिला, राशिद 
मुझे तनहा ही छोड़ दो - सहारों को नहीं समझता हूँ।

न जाने क्यूँ दुश्मनों का क़ब्ज़ा भी प्यारा लगता है 
हमदर्दी नहीं मिलेगा मुझे - हमारों को नहीं समझता हूँ।

Monday, January 6, 2020

बूंध-ए-अश्क़




उसकी आँखों का जाम हमें शराबी बना दिया
रफ्ता रफ्ता मुझे मरीज़-ए-इश्क़ बना दिया।

निगाहों को भी क़ाफी ताक़त होती है ज़रूर
इस बेकार दिल-ए-कोयल को तनिष्क़ बना दिया।

मेरी ही आशिक़ी पर काफी नाज़ था, कल तक
बड़े बड़े चश्मों ने मुझे कनिष्क़ बना दिया।

ज़ंजीर से भी ज़्यादा मज़बूत है उसकी आँचल
लेहराते हुए मुझे ग़ुलाम-ए-इश्क़ बना दिया।

ज़ख़्मी दिल पत्थर बनकर ज़माना हो गया था
इस पत्थर को मोम उसकी बूंध-ए-अश्क़ बना दिया।


Sunday, January 5, 2020

सुहानी हयात


ख्वाब में तुम्हारे साथ एक सुहानी हयात है
जहां भी मोडूं , फरहात ही फरहात है।

मेरी आँखें जलदी में कहीं खोलना नहीं
बर्फ के अंदर आग, ऐसी मेरी हालात है।

दो दिलों का मिलन हो रहा है यहां - चलो,
हात मिलाकर नाचें, खुशियों की बारात है।

एक हज़ार अमावस हमें देखना बाक़ी है
जल्दी करो जानम, अब फेरे सिर्फ सात हैं।


हयात - Life
फरहात - Happiness
अमावस- Full moon

Saturday, January 4, 2020

मुक़म्मलों


अक़्सर मुक़म्मलों के कोई साथ नहीं है
मेहनत करनेवालों को दिन-रात नहीं है।

आलसी क्या जाने, सफ़लता कितना मीठा है
मंज़िल तक पहुँचने का उसकी औक़ात नहीं है।

क़िस्मत को जानने के लिए लखीरें मत देखो
तक़दीर उनका भी बनता है, जिनको हाथ नहीं है।

राह-ए-ख़ुदा पर चलता हूँ, कुछ फ़िक्र नहीं है
हौसला जो रखता है उकसी ऐतियात नहीं है।

घोड़े के इंतज़ार में वक़्त मत  गवाओ, अंजुम
कुछ ऐसे भी निक्काह हैं, जिनमे बारात नहीं है।


मुक़म्मलों  - Achievers
लखीरें - line streaks in one's hands, used in palmistry
राह-ए-ख़ुदा - the guidance/ path of God
ऐतियात . - Caution/ precaution

मुझे भुला दो

नींद की तक़्ती अब मुझे खिला दो
मदहोश के गहरे समंदर में डुबा दो।

ज़िन्दगी न जीने देता है, या फिर मरने
यार, तुम भी हस्ते हस्ते मुझे रुला दो।

अधूरे अरमानें बेचैन भटक रहे हैं
उनको अपनी आँचल में लेके सुला दो।

तेरी तलाश में तेरे ही अंदर मैं गायब हूँ
बस, दिल की गेहरों से मुझे बुला दो।

   

காற்றுக்கென்ன பெயர்

 — தமிழுக்கும், அந்தத் தமிழை என் அய்யா கற்றுக்கொடுத்த நினைவுக்கும் ஒரு சிறு அஞ்சலி. இன்று காலை சிலப்பதிகாரம் மதுரைக் காண்டம் புரட்டிக் கொண்ட...