Saturday, March 22, 2025

अगर तू होती नज़्म

 तुझे सोचा तो धड़कनों में बसा — अगर तू होती नज़्म।

मेरा हर साज़ बनता सदा — अगर तू होती नज़्म।


तेरी तस्वीर में दिखता जतन, दिल तेरा माँगे गुन।

तेरी हर धुन में खोता सदा — अगर तू होती नज़्म।


मैं शहर-शहर तेरा नाम लिए फिरता हूँ सुन।

हर इक महफ़िल में गूँजता सदा — अगर तू होती नज़्म।


मैं हर राही से पूछूँ, तेरा कोई पता धन।

मुझे मिल जाए तेरा पता — अगर तू होती नज़्म।


लबों पे तेरी धुन हो, हो जुबाँ पे तेरा मन।

मेरे हर लफ़्ज़ में रहता सदा — अगर तू होती नज़्म।


"मनन" कहता है, बस तुझ में ही है मेरा हर एक तन।

तेरी हर सांस में जीता सदा — अगर तू होती नज़्म।

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