Musings of a man who is constantly trying to give new perspectives to things we all seemingly know already.
Saturday, May 13, 2023
रामचन्द्राय जनकराजजा मनोहराय
Wednesday, May 3, 2023
श्री नृसिंह जयन्ति सुभदिने...
श्री नृसिंह जयन्ति सुभदिने...
प्रह्लादस्य प्रियम् देवम् नमामि त्वम् श्री नृसिंहं
प्रत्यान्गिर: पतिम् श्रेष्टं वन्दे नृसिंह: श्रियम् ॥
मूर्ध सिम्हम् अर्ध मानवं पूर्ण चन्द्र: प्रसननम्
वर्धमानम् अर्चितायम् स्थम्भ विस्पोटे उत्स्नायम् ॥
हिरण्यकाशिपुं सम्हारिणम् हिरण्य वर्णम् तम् प्रभुम्
नमामी योग नृसिंहं सिम्हाद्रीशाय समन्वितम् ॥
वैशाख शुद्ध चतुर्दशाम् अध्य तव जयन्त्योत्सवम्
यादाद्रि नाथाय शुद्धाय तव पादरविन्दम् चरणम् ॥
दिलीप:
Tuesday, April 25, 2023
नमामि शङ्कर गुरुम्
On the ocassion of Sankara Jayanthi ,
an ode', in Sanskrit, to Adi Shankara
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चतुर मठ स्थापयकं चतुर वेद पालयकं
चतुष्पादयकं अस्माकं नमामि शङ्कर गुरुम् ।
ब्रह्मज्ञान स्वरूपं ज्ञानमुद्रं परमं निर्विकल्पं
विश्व दर्शकम् विश्वरूपं विश्ववन्द्यं शङ्कर गुरुम् ।
स्वयं ब्रह्म स्वरूपं इयं पर्थिव्या महामनीषं
शान्तं प्रणववादिनं च भजेऽहं शङ्कर गुरुम् ।
सर्व वेदान्तार्थ वेदकं विशुद्धं विज्ञानमयं देवं
वेदान्ताचार्यं वन्दे श्रीमद आदि शङ्कर गुरुम् ।
Dilip
Friday, April 21, 2023
Eid Mubarak
जब मेरे घर आओगे तब दिया जला लूँगा।
गले से गला जब लगाओगे तब ईद मना लूँगा।
दोस्ती में है न कोई मंदिर या मज़्जिद, ऐ दोस्त
जहां मांगो दुआ वहीँ सर झुका लूंगा !
Eid Mubarak, my friend!
-Dilip
Tuesday, March 7, 2023
छोटा आस
अबकी होली है, यहां रंगों का रास है।
पिचकारी के बरस में मन उल्लास है।
गुलिस्ताँ की तलाश मैं कभी नहीं करता -
तेरी खुशबू सदा जो दिल के पास है।
तेरी रसीले होंठों से जाम पिया था मैंने
फिर भी मेरी होंठों में क्यूँ प्यास है।
आओ, मेरी ज़िन्दगी में रंग भर दो- बस,
यही इक आशिकी का छोटा आस है।
Friday, March 3, 2023
Keep chugging along, my dear Sridhar
May this Day bring you another feather
You continue use time with all the grace
Your face knows not ever any grimace
You've earned this time to relax and unwind,
And it's well-deserved for all you left behind.
Continue to spread happiness, as you always have done
Enjoy the good things life has to offer, and leave none.
HAVE A HAPPY BIRTHDAY, BRO!
सभयता
वो ब्राह्मण ही क्या जो क्षत्रिय को ज्ञान ना दे।
वो क्षत्रिय ही क्या जो ब्राह्मण को सम्मान ना दे।
हम सब फल हैं एक ही पेड़ के - आखिर
वो सभयता ही क्या है जो दुनिया को इंसान ना दे।
வாழ்க்கை எனும் பயணம்
வாழ்க்கை சொல்லும் கதையெல்லாம் நாளை மறந்திடுமே, வாழ்ந்த தடங்கள் நாமில்லாமல் மண்ணில் மறைந்திடுமே! கல்லாய் கால்கள் கனத்தாலும் நின்று விடாதே, ...
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This is one of the most beautiful Marathi Abhangs I have ever listened to. Ranjani and Gayathri simply take me to a different plane when ...
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I was listening to Devi Mahatmiyam, rendered by Challakere Brothers online today. In my opinion, Challakere Brothers have the best diction o...
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Before I sent away my mother's body to the pyre, a month ago, the Vadhyar had, among other recitations and as part of the rituals, had r...