Thursday, October 1, 2026

एक गिलास में

कुछ दूर तक तो चाँद भी चलता रहा मेरे साथ

फिर खो गया वो जाने किस अजनबी एहसास में


तेरी ख़बर न आई तो दिल ने यही कहा

शायद तू आज भी है किसी और के पास में


हर शाम एक ख़्वाब को सीने से रख लिया

हर रात बुझती आग रही अपनी ही प्यास में


दुनिया ने हमको लाख दिए रिश्तों के लिबास

हम ढूँढ़ते रहे तुझे अपने ही उदास में


अब कौन पूछता है कि क्या खोया, क्या मिला

सब कुछ समा गया है मेरे एक गिलास में


मनन, ये ज़िंदगी भी अजब शाम हो गई

डूबा हुआ है आदमी अपने ही विश्वास में

--Dilip

No comments:

வாழ்க்கை எனும் பயணம்

 வாழ்க்கை சொல்லும் கதையெல்லாம் நாளை மறந்திடுமே, வாழ்ந்த தடங்கள் நாமில்லாமல் மண்ணில் மறைந்திடுமே! கல்லாய் கால்கள் கனத்தாலும்  நின்று விடாதே, ...