Saturday, September 5, 2015

मैं क्या करूँ



मोहब्बत  का इम्तिहान हुआ तो मैं क्या करूँ
तुम्हारी यादों का मजमाँ हुआ तो मैं क्या करूँ

सुहाना सपना  समझकर तुम्हें भूल सख्ता हूँ - पर
दिल में जज़्बात का हंगामा हुआ तो मैं क्या करूँ

कश्ती में तेरे साथ मेरे पयार का भी बिदाई दूँ - पर
विरह का सफरनामा हुआ तो मैं क्या करूँ

सितारों की महफ़िल में रात खैर गुज़ार लूँ - सेज
सूनापन का मज़हरनामा हुआ तो मैं क्या करूँ








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