Sunday, February 27, 2022

इच्छा दिलाया न करो

अंधों के सामने दिया कुछ दिखाया न करो। 

ज़ख़्मी सीने  पे ख़ंजर चलाया न करो।

 चिराग़ में जलने की क़िस्मत है परवाने को 

उसे और जीने की इच्छा दिलाया न करो !


शिद्दत-ए-शोले -ए-जज़्बात  है दिल में 

इस वक़्त हवा को बुलाया न करो। 


उसकी आँखों में और नमी नहीं 

उसे अब और रुलाया न करो। 



 

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