Saturday, July 19, 2025

छुपा हर रंग

 हर सूरत में छुपा है नूर-ए-ख़ुदा का रंग है ।

जो भी देखा है उसे में हुस्न का एक अंग है ।।

आँखों में आँसू छुपाए दिल ने कहा ये राज़ ।
ख़ामोशी के पीछे छुपा हर लफ़्ज़ का संग है ।।

रात के सीने में छुपी है दर्द की एक बात ।
चाँदनी भी कह रही है दिल का बड़ा तंग है ।।

राह में जो भी मिला उसने दिया एक सबक ।
ज़िंदगी का हर मक़ाम एक छोटा सा रंग है ।।

वक़्त से लड़ते रहे हम ख़ुद से भटक कर ।
अपने ही अक्स में छुपी कुछ और ही जंग है ।।

पूछे कोई तो क्या कहे इस हाल-ए-पुर्सरार को ।
"मनन" के हर शेर में एक बेज़बां दंग है ।।

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