Saturday, July 19, 2025

उसकी नज़रों का इंक़लाब

 कमाल सी कोमल है वो, अब पंखुड़ी जैसे गुलाब ।

उसकी बातों में है ग़ज़ल, वो है किसी शायर का ख़्वाब ।॥


नज़रों की चालों में है इक, शोख़ हवाओं की सरसर

लबों से बहती है नशा, जैसे छलकता हो शराब ।


रुख़ पे उजाला है ऐसा, जैसे सहर की पहली किरन

बदन की नरमी में छुपा, कोई रज़ा कोई हिजाब ।


उसके क़दम चलें तो लगे, फूल बिछे हों रास्ते

उसके लिबासों से उठे, रेशमी ख्वाबों का हिज्जाब ।


हर इक झलक में नाज़ है, हर मुस्कराहट में फितनह

नज़ाकतें यूँ झूमतीं, जैसे हो इश्क़ी इंक़लाब ।


"मनन" ने जब भी देखा उसे, साँसें हुईं बे-इख़्तियार

वो ज़िंदगी की आरज़ू, वो है मेरा आख़िरी निसाब ।।



फितनह: Mischief, seduction, temptation,

नज़ाकतें: Delicacies, gentleness, elegance.

झूमतीं: To sway, dance gracefully, or move rhythmically.

 निसाब. Curriculum, lesson


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