Thursday, June 13, 2013

तेरी यादें



तेरी मुस्कुराहट को मेरे यहाँ छोड़ गये हो
और मेरी दिल को सात में ले चले हो
मेरी ज़िन्दगी में हवा का झोंका बनके आये हो
पर दिल में प्यार का ज़ख्म देखे लौट गये हो

गुलशन अधूरा है बहारों के बिना
सूरजमुखी अधूरा है आदित्य के बिना
में न रह सकती हूँ तुम्हारे नज़दीकी के बिना
जैसे शरीर न रहे सांस के बिना.

ख़ुशी का दौर आया था मांगे बगैर
ऐसा लगा नशा आया था पैमाने के बगैर
मुझे क्या पता था, कि जीवन की दो रंग हैं
और ग़म भी सात में आयेगा तमन्ना के बगैर

मेरी बाहों को मैंखाना समझके आ लो
मेरी आंसूं को शराब समझके पी लो
मेरी महफ़िल में जल्दी लौट आ लो
सेज सूनी है उसे फिर जीवन से सजा लो 

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