Tuesday, October 29, 2013

मेरी चाँद मुझे छोड़ी

छोटी सी बात पर मेरी चाँद मुझसे खफ़ा हुयी है - तो
एक दीया जलाकर मेरे आँगन में रख लिया हूँ

ऐसा लगा कि मुझे छोडकर वह दूर चल रही है -तो
गम का सागर को अश्खों के पीछे रोक लिया हूँ

महफ़िल में सैकड़ों हैं तो क्या फर्क पड़ी है - अब
तन्हाई का दर्द को मुस्कुराहट से छुपा लिया हूँ

मुहब्बत मिचली है यह उसने दिखाकर गयी है- तो
आंसूओं को दवा बनाकर पीना सीख लिया हूँ

❣D❣

मिचली=illness




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