Monday, June 17, 2019

रंग रलियां लगने लगे हैं

तेरे बिना लम्हें भी
सदियाँ लगने लगे हैं।
पर तेरी अदाएं तो
रंग रलियां लगने लगे हैं ॥

तेरी अंगड़ाइयों को मेरे
पास ही रहने दो।
मेरे कट्टर दुश्मनें भी
परियां लगने लगे हैं ॥

तक़लीफ़ें जब मेरी
नींद को उड़ाने लगे हैं ।
वह मधभरी आँखें नींद की
गोलियां लगने लगे हैं ॥

तेरी साथियों से बचके
मेरे पास आ जाओ ।
वह मेरी प्यार के रस्ते में
गड्डियां लगने लगे हैं ॥

जो बोल नहीं पाते वह
इशारों से बता दो ।
वह मेरे दरवाज़े-ए-प्यार के
हंडियां लगने लगे है॥

बिक्रे हुए तेरी ज़ुल्फ़ों से
मैं मसहूर हुआ हूँ  ।
वह मुझे प्यार से बांदनेवाले
डोरियां लगने लगे हैं ॥

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