होटों को भी क्या मज़बूरी होती है
वहीं बात छुपाते हैं जो कहना ज़रूरी होती है
दिल लाख छुपाए राज़, निगाहें कह देती हैं
आँखों की मगर अपनी भी मज़बूरी होती है
पास आकर भी क्यों दिल तक कोई पहुँच नहीं पाता
इश्क़ में कैसी यह अनकही दूरी होती है
कुछ ख़्वाब हक़ीक़त से पहले ही टूट जाते हैं
कुछ ख़्वाबों की ताबीर भी अधूरी होती है
वो बात जो कह दें तो फ़साना बदल जाए
कुछ सच की ख़ामोशी ही तो पूरी होती है
मनन, दिल को समझाना आसान नहीं होता
हर ज़ख़्म की दुनिया में कहाँ मंज़ूरी होती है
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