Thursday, October 8, 2026

ज़रूरी होती है

 होटों को भी क्या मज़बूरी होती है  

वहीं बात छुपाते हैं जो कहना ज़रूरी होती है  


दिल लाख छुपाए राज़, निगाहें कह देती हैं  

आँखों की मगर अपनी भी मज़बूरी होती है  


पास आकर भी क्यों दिल तक कोई पहुँच नहीं पाता  

इश्क़ में कैसी यह अनकही दूरी होती है  


कुछ ख़्वाब हक़ीक़त से पहले ही टूट जाते हैं  

कुछ ख़्वाबों की ताबीर भी अधूरी होती है  


वो बात जो कह दें तो फ़साना बदल जाए  

कुछ सच की ख़ामोशी ही तो पूरी होती है  


मनन, दिल को समझाना आसान नहीं होता  

हर ज़ख़्म की दुनिया में कहाँ मंज़ूरी होती है

No comments:

நான் கொடுக்க மறுக்க இருந்த இருக்கை

கடந்த மார்ச் மாதம் சிங்கப்பூரிலிருந்து பெங்களூருக்கு விமானம் ஏறியபோது நடந்த சம்பவம் இது. எனக்கு அன்றைக்குக் கடுமையான முதுகுவலி. ஒவ்வொரு அடி ...