Saturday, January 4, 2020

मुझे भुला दो

नींद की तक़्ती अब मुझे खिला दो
मदहोश के गहरे समंदर में डुबा दो।

ज़िन्दगी न जीने देता है, या फिर मरने
यार, तुम भी हस्ते हस्ते मुझे रुला दो।

अधूरे अरमानें बेचैन भटक रहे हैं
उनको अपनी आँचल में लेके सुला दो।

तेरी तलाश में तेरे ही अंदर मैं गायब हूँ
बस, दिल की गेहरों से मुझे बुला दो।

   

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