जीत-हार से परे जो सुकून को चुन ले,
वही समझ पाए ये संसार किसके लिए!
जो छोड़ गया अहंकार वक़्त के दर पर,
असल में वही जी गया ये ज़िन्दगी किसके लिए!
जो भीड़ में भी खुद से मिलने की चाह रखे,
वो राह भटक कर भी पा ले मंज़िल किसके लिए!
दौलत-ओ-शोहरत की दौड़ में जो ना भागे,
वही तो जान पाए दिल की तड़पन किसके लिए!
सच्चा ज्ञान वो जो मौन की गहराई में मिले,
शब्दों के शोर छोड़ खामोशी अपनाए किसके लिए!
जो पल-पल को जीना सीख गया सच में 'मनन',
उसी ने जाना कि ये सांसें चल रही किसके लिए!
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