दुनिया बदल रही है हर पल, हर दिन,
पर हमारी आवाज़ का है अपना रंग, अपना ढंग।
हम बच्चे हैं, पर हैं हमारे सपने बुलंद,
कल का नक्शा बनाएँगे, मिलकर सब संग।
नक्शा वो योजना, जिससे बनती इमारत मज़बूत,
ऐसे ही हम बनाएँगे, एक दुनिया खूबसूरत।
बोलेंगे जब कुछ ग़लत हो, करेंगे सही का साथ,
पर्यावरण की रक्षा में, बढ़ाएँगे हाथ।
स्कूल में, घर में, हर जगह उठे हमारी आवाज़,
कला से, लेखन से, तकनीक से खोलें नए राज़।
दयालुता, समानता, ज़िम्मेदारी का पाठ,
एक आवाज़ बने लहर, फिर लहरें बनें साथ।
आज के फ़ैसले बनाएँगे कल का संसार,
शांति, स्वच्छता, अवसर का हो विस्तार।
हिम्मत और रचनात्मकता से सजाएँगे जहान,
एक विचार, एक कदम, एक आवाज़—यही हमारी पहचान।
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