Sunday, September 6, 2026

दूर आपसे अब तो नही रहना है

 कहने की नही बात मगर कहना है,

दूर आपसे अब तो नही रहना है,
ज़ुल्म दुनिया के हँस के सहूँगा मगर,
जुदाई का ये सदमा नही सहना है।
काट दी मैंने आधी उम्र तन्हाई में,
बाक़ी सफ़र बस तेरे साथ कटना है।
शाम ढलते ही यादें घेर लेती हैं,
इन धड़कनों को अब तुझमें ही बहना है।
'मनन' माँगता है बस एक दुआ रब्ब से,
ज़िंदगी भर मुझे तेरा साया बनके रहना है।

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