रुप क्यूँ है दमका, रंग क्यूँ है चमका, साँस तेरी महकी है क्यूँ?
मस्ती जो है बहकी, चुनरी तो है ढलकी, ये चाल तेरी बहकी है क्यूँ?
क्यूँ आग से तू तपे, कुछ तो है तेरे मन में, बात कोई अधूरी सी है
है कैसा नशा छाया, किसने तुझे बहकाया, गिरती सम्हलती है क्यूँ?
है कैसा नशा छाया, किसने तुझे बहकाया, गिरती सम्हलती है क्यूँ?
मौसम ने क्या छेड़ा, कोई ख़्वाब क्या देखा, होश गँवा बैठी है तू
साए से तू डरे, रह-रह के आहें भरे, धूप में पिघलती है क्यूँ?
साए से तू डरे, रह-रह के आहें भरे, धूप में पिघलती है क्यूँ?
आईने के आगे खड़ी, ख़ुद से ही बातें बड़ी, राज़ छुपाती है क्या
दीवाने की चाहत में, या चाहत की राहत में, शम्अ सी जलती है क्यूँ?
दीवाने की चाहत में, या चाहत की राहत में, शम्अ सी जलती है क्यूँ?
'मनन' इस दीवाने को, दिल के आशियाने को, तूने आवाज़ ही न दी
अश्कों की ये रवानी, दर्द की ये कहानी, चुपचाप तू सहती है क्यूँ?
अश्कों की ये रवानी, दर्द की ये कहानी, चुपचाप तू सहती है क्यूँ?
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