Monday, June 17, 2019

रंग रलियां लगने लगे हैं

तेरे बिना लम्हें भी
सदियाँ लगने लगे हैं।
पर तेरी अदाएं तो
रंग रलियां लगने लगे हैं ॥

तेरी अंगड़ाइयों को मेरे
पास ही रहने दो।
मेरे कट्टर दुश्मनें भी
परियां लगने लगे हैं ॥

तक़लीफ़ें जब मेरी
नींद को उड़ाने लगे हैं ।
वह मधभरी आँखें नींद की
गोलियां लगने लगे हैं ॥

तेरी साथियों से बचके
मेरे पास आ जाओ ।
वह मेरी प्यार के रस्ते में
गड्डियां लगने लगे हैं ॥

जो बोल नहीं पाते वह
इशारों से बता दो ।
वह मेरे दरवाज़े-ए-प्यार के
हंडियां लगने लगे है॥

बिक्रे हुए तेरी ज़ुल्फ़ों से
मैं मसहूर हुआ हूँ  ।
वह मुझे प्यार से बांदनेवाले
डोरियां लगने लगे हैं ॥

Monday, June 10, 2019

नुकीले रिश्ते



रोज़ बाहर रिश्तों का मेला है,पर
मन में कुछ अजीब सा अलबेला है।
महफिलें चाहे जितने भी भरे हो
अंदर से हर इंसान अकेला है॥

यूँ गिरते संभलते चलना, जनाब
ज़िन्दगी का हर मोड़ पथरीला है॥
नाते जोड़कर भी तन्हा महसूस है 
यह ही ज़िन्दगी का झमेला है॥

अब और मत पिलाओ बंधनों का शररब
होंटों की मीठी बोल भी ज़हरीला है॥
दिल-ए-ज़ख्म क्यूँ सीख़ता नहीं, अंजुम
कि रिश्तों का असर नुकीला है॥


Sunday, June 9, 2019

धड़कन-ए-दिल

धड़कन-ए-दिल में मस्ती की रवानी है
मेरे पलकों की छाँव में तेरी जवानी है

यह किसी पन्ने-ए-क़िताब में नहीं मौजूद
यह हमारी मुहब्बत की कहानी है

तेरी आखों में कुछ नयी चमक आजकल 
वह चमक नहीं, वह प्यार की निशानी है

तेरी शहर से दूर, पर तेरी यादें बरक़रार
फिर  भी तन्हाई , यह बात-ए-हैरानी है

ख़्वाबों में तेरी अंगड़ाई की बारात, सनम  
तो जुनून नहीं, कि मेरी हर रात सुहानी है

Monday, June 3, 2019

इज़्न-ए-परवाज़

समंदर से दरिया आज कुछ नाराज़  है
मुड़मुड़के देखने में भी कुछ राज़ है

नाशनीदा है ऐसी कोई गुलिस्ताँ
जिसको बहारों का छूने से कुछ ऐतराज़ है

दिन रात अब बेचैनी फैलाएगी सनम   
बेदार रातों की सिर्फ यह आगाज़ है

तेरी अंगड़ाइयों से फ़रिश्ते भी रश्क़ हैं 
कह देना की बस, यह तेरी अंदाज़ है

तेरी पैरों की पायल को संभल लेना
वह आवाज़-ए-प्यार सुनाने की साज़ है

पलकों को इतना भी भटकने न देना
मेरे दिल के वह इज़्न-ए-परवाज़ है  

Thursday, May 23, 2019

जी भर के देखने दो

जी भर के देखने दो
वतन की नयी दिशा

जिसके सूत्र मोदी है
और सूत्रदारी अमित शाह   

Sunday, May 19, 2019

कोई लाइबा नहीं


हाल-ए-दिल कैसे सुनाऊँ
इश्क़ की कोई तजुर्बा नहीं

निगाहें मिली, बस, बिजली चली
जहां कोई तार-ए-ताम्बा नहीं

यह हमारी प्यार की इमारत है
ठूठे ख़्वाबों की मलबा नहीं

प्यार किया तो  अब डरना क्या
हाथ थामने में झिजक तौबा नहीं

नोचना मुझे फिर एक बार
यक़ीन नहीं है तुम कोई लाइबा नहीं


ख़ुराफ़ात बच्ची

में ख़्वाब में बार बार खैरियत पूछी थी
नहीं लगा कि मेरी हैसियत सोची थी
दिल ने कहा, प्यार की रिवायत सच्ची थी
पर हक़ीक़त में वह ख़ुराफ़ात बच्ची थी 

வாழ்க்கை எனும் பயணம்

 வாழ்க்கை சொல்லும் கதையெல்லாம் நாளை மறந்திடுமே, வாழ்ந்த தடங்கள் நாமில்லாமல் மண்ணில் மறைந்திடுமே! கல்லாய் கால்கள் கனத்தாலும்  நின்று விடாதே, ...