बहुत कुछ हुआ, जो नहीं होना था
बहुत रोया भी था , जबके नहीं रोना था।
क्या बोलूं, जी तो भर गया था
मार बहुत खाया था , जो नहीं खाना था।
बहुत रोया भी था , जबके नहीं रोना था।
क्या बोलूं, जी तो भर गया था
मार बहुत खाया था , जो नहीं खाना था।
Musings of a man who is constantly trying to give new perspectives to things we all seemingly know already.
— தமிழுக்கும், அந்தத் தமிழை என் அய்யா கற்றுக்கொடுத்த நினைவுக்கும் ஒரு சிறு அஞ்சலி. இன்று காலை சிலப்பதிகாரம் மதுரைக் காண்டம் புரட்டிக் கொண்ட...
No comments:
Post a Comment