Sunday, April 12, 2020

कहीं न कहीं कम पड़ा

मोहब्बत में ख़ुशी के बजाय ग़म पड़ा। 
शायद प्यार में कहीं न कहीं कम पड़ा।

मेरे सीने में उल्फत की आग तब बुझी
जब तेरी एक नज़र से शबनम पड़ा।

सदक़ा उतारना था, ज़माने से बचने के लिए 
एक ही बुरी नज़र, और दिल में जहन्नम पड़ा।

हर ज़ख़्मी दिल का पनाह मैक़दा ही है
हर जाम में शराब के ज़रिये मर्हम पड़ा।

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