Friday, June 26, 2026

ख़ुद को खोना है

मोहब्बत में सुलगती इस अधूरी जान को चूमना है,
तरसती हैं ये आँखें तेरी सूरत को देखना है।
जुदा हालात ने कर तो दिया है हमसे तुमको पर,
नसीबों से लड़कर इन हाथों से तेरे बदन को छूना है।
सहर-ओ-शाम बस तेरी ही ख़ुशबू का तसव्वुर है,
दुआ है अब तो आगोश में भर के तुझ को पाना है।
लकीरों को मिटाकर अपनी आवारगी की रातों में,
तेरे सुर्ख होंठों से अपनी धड़कन को सजाना है।
बिछड़कर तुझसे जीने की तमन्ना मर गई जैसे,
तेरी बाहों में रहकर इस सुलगते बदन को बुझाना है।
ज़माने की बंदिशें अब रोक न पाएँगी 'मनन ' को,
कसम है तुझको ही गले से लगाकर ख़ुद को खोना है।

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