Monday, June 29, 2026

तू ही है ।

 मैं सितार  हूँ, मेरी हर धड़कन का तार तू ही है

जो बजाए, जो गाए, जो सुने — वो सरकार तू ही है ।

मैंने सोचा था मैं अलग हूँ, तू अलग है —
पर जब झनझनाई सितार , समझा — इक़रार तू ही है ।

बरसों तक मैं ढूँढता रहा तुझे मंदिर मंदिर —
अब जाना — मेरे भीतर खिलती जो बहार, तू ही है ।

तार बिन सितार  क्या, सितार  बिन तार क्या —
यह जो मिलन है, यह जो इंतज़ार — तू ही है ।

जिस पल छुआ तूने — मैं राग बन गया —
मेरे हर सुर का, हर स्वर का आधार तू ही है ।

'मनन' समझा आख़िर — न मैं था, न तू था —
बस एक नग़्मा था — उस नग़्मे का मेदार तू ही है ।

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