Monday, June 29, 2026

वही योगी है ।

 जो हल चलाए खेत में झुककर — वही योगी है

जो माटी में खुद को मिला दे — वही योगी है ।

मंदिर में जो आँखें मूँदे वो ध्यान नहीं जानता
जो बीज बोए ज़मीन पे झुककर — वही योगी है ।

पंडित ने जो पोथी पढ़ी वो शब्द थे केवल
जिसका पसीना गिरे खेत में यक़ीन — वही योगी है ।

ीरे की तलाश में दुनिया भटकती रही सदा
जो माटी में ढूँढे नगीन — वही योगी है

वो जो न्यायी हो, सच्चा हो, मेहनत का बंदा हो
जो हर फ़सल में हो अमीन — वही योगी है ।

'मनन' ने जाना — साधना खेतों में उतरती है
जो झुके, जोते, बोए ज़मीन — वही योगी है

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