Monday, June 29, 2026

सबका हमसफ़र हो जा

 किसी की सरहदों से बंध के मत रह, दिल मेरे — बेघर हो जा

वो जो है सबमें, उसमें खो के अपना घर हो जा ।

जहाँ से आई थी वो रोशनी, उसी का हिस्सा बन

किसी से डर के मत रुक, आत्मा — निडर हो जा ।


न जाति, न मज़हब, न देश की हो कोई ज़ंजीर तुझ पे

इन सब दीवारों से ऊपर उठ, बेअसर हो जा ।


जो नाम दिया तुझे दुनिया ने, वो भी एक क़फ़स था

उस पर्दे को हटा, 'मनन' — बेख़बर हो जा ।


ये कायनात पुकारे तुझको  "हे बेघर बंदे !"

बस एक ही नग़्मा बन, सबका हमसफ़र हो जा ।

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सबका हमसफ़र हो जा

 किसी की सरहदों से बंध के मत रह, दिल मेरे — बेघर हो जा वो जो है सबमें, उसमें खो के अपना घर हो जा । जहाँ से आई थी वो रोशनी, उसी का हिस्सा बन ...